जीरो एफआईआर कहीं भी दर्ज कराई जा सकती है।

FIR यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट अंग्रेजी में कहें तो First Information Report को लेकर कानून में कई चीजें बदलने वाली हैं। जी हां, मोदी सरकार ने न्याय प्रणाली को सरल और सुगम बनाने के लिए अंग्रेजों के समय से चली आ रही कानून व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। तीन नए विधेयक लोकसभा में पेश किए गए हैं। भारतीय नागरिक संहिता के तहत कई कानूनी प्रावधान किए गए हैं। आइए जानते हैं कि एफआईआर को लेकर सरकार क्या बदलाव करने जा रही है।

सरकार ने एफआईआर करने के बाद चार्जशीट और फैसला आने की भी डेडलाइन तय कर दी है। ई-एफआईआर भी अब आप आसानी से दर्ज करा सकेंगे। सरकार तीन नए बिल लाई है जिसके जरिए कई कानूनी प्रावधान किए गए हैं। पुलिस अधिकारी को आरोपी की गिरफ्तारी में लेने का प्रमाण पत्र भी देना होगा।

गिरफ्तारी का सर्टिफिकेट मिलेगा

  • पहली बार ई-प्राथमिकी दर्ज करना संभव होगा।
  • देश में अपराध कहीं भी हो, उसकी शून्य प्राथमिकी (जीरो एफआईआर) कहीं से भी दर्ज कराई जा सकेगी। संबंधित थाने को 15 दिन के अंदर शिकायत भेजी जाएगी।
  • हर जिले में एक पुलिस अधिकारी होगा जो हिरासत में लिए गए आरोपियों के परिजनों को उन्हें गिरफ्त में लेने का प्रमाणपत्र देगा। यह सूचना व्यक्तिगत रूप से और ऑनलाइन देनी होगी।

जजमेंट देने की भी समयसीमा

  • FIR के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होगा। उसे एक बार 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। चार्जशीट दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर कोर्ट को आरोपतय करना होगा।
  • इतना ही नहीं, मामले की सुनवाई पूरी होने के 30 दिनों के भीतर जजमेंट देना होगा। जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के भीतर उसकी कॉपी उपलब्ध होना अनिवार्य होगा।
  • सर्च और जब्ती जो होगी, उसकी वीडियोग्राफी की बात कही गई है।
  • फॉरेंसिक टीम अनिवार्य तौर पर क्राइम स्पॉट पर जाएगी। इसका भी प्रावधान किया जा रहा है।
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फांसी बदलेगी तो…

  • सेक्सुअल क्राइम की पीड़िता के बयान की वीडियोग्राफी निश्चित तौर पर होगी। सभी तरह के गैंगरेप में 20 साल या उम्रकैद का प्रावधान होगा। नाबालिग से रेप में फांसी तक की सजा का प्रावधान होगा।
  • फांसी की सजा में छूट होने पर उम्रकैद में बदला जा सकता है। उम्रकैद की सजा कम करके सात साल तक कैद हो सकता है।
  • वीडियोग्राफी होने पर मुकदमे के अंत तक थाने में गाड़ियों को नहीं रखा जाएगा।